हाँ बाढ़ ……..

By Dr.Abhay Kumar

तुम सौगात लेकर आए,

हाँ ,सौगात लेकर आए तुम,

मिस्टी ,प्रेम ,और खुसी की नहीं ,

रुदन ,क्रंदन ,दर्द ,चीत्कार,

और आंसू के .हाँ बाढ़ ……..

तुमने हमें लूटा नहीं ,

बस दिया है -

एक अनंत और अमीट पीड़ा .

छीनकर  मेरे लाल को,

मिटाकर मेरे सिंदूर को ,

ज़ुदाकर मेरी  माँ को ,

हाँ बाढ़ ,तुमने हमें लूटा नहीं ,

बस दिया है -

रुदन ,क्रंदन ,दर्द ,चीत्कार,

और आंसू……..अब मेरे आंसू भी ,

सूख चुके हैं ;

मैं अब मस्त हूँ ,

अपने घर से दूर ,

स्टेशन,चौक ,

और तम्बुओं  में .

कोई डर नहीं अब ,

अथाह साहस दिया है ,

तुमने मुझे .

तुम सौगात लेकर आए,

शांति ,समृधि ,खुशाली की नहीं ;

दर्द ,चित्कार और बलात्कार  के,

देखकर अपने हीं,

बहन और बेटी के ….

मेरे अब रोंगटे ,

खड़े नहीं होते ,

भावनाएं अब फीकी ,

पड़ चुकी है …

तुम्हे क्या लगता है ,

मानवता को तुमने ,

नष्ट कर दिया है ?

तेरे हुंकार से मैं ,

मर जाऊंगा ?

अरे तुम ,

मरे को  क्या मारते हो ?

मारना  है तो उसे मारो ,

जिवीत होने का जो ,

ढोंग कर रहे हैं.

तांडव कर रहा ,

राजनीति के ,

जंजाल बनाकर;

हाँ उसे गिलो ,

जिसने तुम्हे यह रूप दिया …

कब तक तुम ,

हमें नस्ट करोगे ?

कब तक …….?

गेहूं के खेत ,

फिर हरे होंगे ….

हाँ बाढ़ ……..

फिर मेरे परिजन लौटेंगे ,

फिर किलकारियां होंगी,

मेरे  आँगन में ……..

One Response to “हाँ बाढ़ ……..”

  1. mithilesh aditya Says:

    thanks

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